नोटबंदी से भारत की इकोनॉमी बिगड़ी; नई करंसी करप्शन को खत्म करने में कामयाब होगी

अमेरिकी अखबार न्यूयॉर्क टाइम्स (NYT) ने नोटबंदी पर अपने आर्टिकल में लिखा है, “भारत में पुराने नोट बंद हुए दो महीने बीत चुके हैं। लेकिन हालात नहीं सुधरे हैं। इकोनॉमी लगातार बिगड़ रही है। मैन्यूफेक्चरिंग सेक्टर सिकुड़ रहा है। रियल एस्टेट और कारों की बिक्री में गिरावट आई है। मजदूरों, दुकानदारों का कहना है कि कैश की कमी से अभी भी मुश्किलें बढ़ी हुई हैं। इस बात के आसार कम हैं कि नई करंसी करप्शन खत्म करने में कारगर साबित होगी।” मोदी के फैसले से देश की 86% करंसी बाहर हो गई…demonetisation-1-new_1484
 
  NYT ने लिखा, “पीएम नरेंद्र मोदी ने 8 नवंबर को 500/1000 के पुराने नोट खत्म करने का फैसला लिया। इसके चलते 86 फीसदी करंसी चलन से बाहर हो गई।”
 “पुराने नोटों की जगह 500/2000 के नए नोट आ गए।”
“लोगों को बैंकों में 30 दिसंबर तक पुराने नोट जमा करने की छूट दी गई। सरकार ने ये भी कहा कि लोग हर हफ्ते एक सीमित संख्या में ही अकाउंट से पैसे निकाल सकते हैं।”
“इस कवायद का मकसद ये पता लगाना था कि किसने ब्लैकमनी छिपाकर रखी है या फिर कौन टैक्स बचाकर करप्शन कर रहा है।”
“मोदी सरकार ने बाद में कहा कि वह चाहती है कि लोग इलेक्ट्रॉनिक ट्रांजेक्शन करें।”
 
‘सरकार का नोटबंदी का फैसला गलत तरीके से प्लान किया गया’
– आर्टिकल में ये भी लिखा गया, “मोदी सरकार ने नोटबंदी का फैसला गलत तरीके से प्लान और लागू किया।”
– “बैंक में पैसे जमा करने और निकालने के लिए लोग घंटों लाइन में लगे रहे।”
– “सरकार ने नए नोट ज्यादा तादाद में नहीं छापे। इसके चलते उनकी सप्लाई पर असर पड़ा।”
– “कैश की कमी की सबसे ज्यादा मार छोटे शहरों और गांवों में पड़ी।”
– “आरबीआई के मुताबिक, 23 दिसंबर को 9.2 लाख करोड़ चलन में थे, जबकि 4 नवंबर को 17.7 लाख करोड़। यानी नोटबंदी के एक महीने के बाद बाजार में कैश आधा रह गया।”
– “कुछ हफ्ते में ज्यादातर करंसी के बाहर होने से कोई भी इकोनॉमी बैठ नहीं सकती। लेकिन भारत में स्थिति अलग है। यहां 98% ट्रांजेक्शन कैश में होता है।”
– “हालांकि भारत में डेबिट कार्ड्स और मोबाइल से मनी ट्रांसफर का चलन बढ़ा है। हालांकि ज्यादातर दुकानदार अभी भी इलेक्ट्रॉनिक पेमेंट नहीं ले रहे हैं।”
 
‘करंसी बदलने से करप्शन खत्म होने की कम संभावना’
– न्यूयॉर्क टाइम्स के मुताबिक, “इस बात की संभावना कम है कि सरकार के नोटबंदी के फैसले और नई करंसी से करप्शन खत्म हो जाएगा।”
– “एक बार जब ज्यादा कैश हो जाएगा तो लोग फिर जमा करने लगेंगे।”
– “सरकार ने कहा था कि ढाई लाख तक अपने अकाउंट में रख सकते हैं। उन्हें बताना होगा कि इस पैसे का टैक्स दिया गया है।”
– “अफसरों को उम्मीद थी कि इन नियमों के चलते काफी ब्लैकमनी बैंक में वापस नहीं लौटेगी।”
– “हालांकि भारतीय मीडिया ने कहा कि लोगों ने काफी तादाद में पुराने जमा कराए।”
– “इसका मतलब ये हुआ कि या तो ब्लैकमनी बाहर ही नहीं आई या फिर पैसे जमा करने के लिए जमकर टैक्स की हेराफेरी की गई। इसे सरकार नहीं पकड़ पाई।”
 
‘लोगों ने कहा कि वे करप्शन खत्म के लिए तकलीफ झेलने को तैयार’
– न्यूयॉर्क टाइम्स के मुताबिक, “भारत के कई लोगों ने ये कहा कि वे करप्शन खत्म करने तकलीफ झेलने को तैयार हैं।”
– “लेकिन उनका सब्र तब जवाब दे जाएगा जब कैश की कमी जारी रही और नई करंसी लाना करप्शन और टैक्स चोरी नहीं रोक पाया।”

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