बर्फबारी न होने से ‘घट’ रहा हिमालय

ग्लोबल वार्मिंग के कारण मौसम का मिजाज बदलने से हिम रेखा पीछे खिसकती जा रही है, जिससे हिमालयी क्षेत्र में बर्फ क्षेत्र घट रहा है।himalaya_1473926352

हिम रेखा के पीछे खिसकने से बर्फ से खाली हुई जमीन पर वनस्पतियां उग रही हैं। पेड़ और झाड़ियां (ट्री लाइन) जितने ऊपर जाएगी, ग्लेशियरों की सेहत के लिए उतना खतरा बढ़ेगा।

दिसंबर और जनवरी में अभी तक बर्फबारी कम होने से विज्ञानियों की उलझन बढ़ गई है। देर हुई तो बढ़े तापमान की वजह से बर्फबारी बारिश में तब्दील हो जाएगी।

जलवायु परिवर्तन का यह प्रभाव मध्य हिमालयी क्षेत्र के बर्फ से ढके रहने वाले इलाके पर पड़ रहा है। गंगोत्री का भोजवासा क्षेत्र जो कभी बर्फ से ढंका लकदक रहता था, वहां वनस्पतियां उग आई हैं। गंगोत्री ग्लेशियर पहले जहां तक फैला हुआ था, वहां हिम रेखा पीछे खिसकने से ग्लेशियर सिकुड़ रहा है।

विज्ञानियों का कहना है कि वनस्पतियां उग आने से यहां बर्फ गिरी भी तो इकट्ठी नहीं हो पाती है। वनस्पतियों की वजह से माहौल बदल जाता है। इसी तरह पूरे हिमालयी क्षेत्र में विज्ञानियों ने ट्री लाइन ऊपर जाने और स्नो लाइन पीछे खिसकने की पुष्टि की है।

विज्ञानियों का कहना है कि ऊपर (हाई एल्टीट्यूड) पर बर्फ चाहे जितनी गिरे, जब तक यह नीचे की ओर नहीं आएगी ग्लेशियरों की सेहत में सुधार नहीं होगा।

जलवायु परिवर्तन का यह प्रभाव मध्य हिमालयी क्षेत्र के बर्फ से ढके रहने वाले इलाके पर पड़ रहा है। गंगोत्री का भोजवासा क्षेत्र जो कभी बर्फ से ढंका लकदक रहता था, वहां वनस्पतियां उग आई हैं। गंगोत्री ग्लेशियर पहले जहां तक फैला हुआ था, वहां हिम रेखा पीछे खिसकने से ग्लेशियर सिकुड़ रहा है।

विज्ञानियों का कहना है कि वनस्पतियां उग आने से यहां बर्फ गिरी भी तो इकट्ठी नहीं हो पाती है। वनस्पतियों की वजह से माहौल बदल जाता है। इसी तरह पूरे हिमालयी क्षेत्र में विज्ञानियों ने ट्री लाइन ऊपर जाने और स्नो लाइन पीछे खिसकने की पुष्टि की है।

विज्ञानियों का कहना है कि ऊपर (हाई एल्टीट्यूड) पर बर्फ चाहे जितनी गिरे, जब तक यह नीचे की ओर नहीं आएगी ग्लेशियरों की सेहत में सुधार नहीं होगा।

 
 
 

Leave a Reply

Your email address will not be published. Required fields are marked *